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Ripped Jeans-Geetanjali Mishra and Priyanka Chaturvedi-Filmynism

Rawat’s Ripped Jeans : फटी हुई मानसिकता से फटा हुआ कपड़ा ज्यादा अच्छा!

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत (Tirath Singh Rawat) द्वारा महिलाओं के पहनावे यानी फटी जींस (Ripped Jeans) पर टिप्पणी किए जाने के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है। हर कोई तीरथ रावत के बयान की निंदा कर रहा है। पाॅलिटिशियन के अलावा बाॅलीवुड व टीवी के कलाकार भी इस टिप्पणी पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। टीवी अभिनेत्री गीतांजलि मिश्रा (Geetanjali Mishra) ने अपनी फोटो शेयर कर लिखा है फटी हुई मानसिकता से फटा हुआ कपड़ा ज्यादा अच्छा है, तो शिवसेना सांसद प्रियंका चतुर्वेदी (Priyanka Chaturvedi) ने रावत की मानसिकता पर ही सवाल खड़ कर दिया है।

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अभिनेत्री गीतांजलि मिश्रा (Geetanjali Mishra) ने अपनी दोस्त के साथ तस्वीर शेयर किया है। एक तस्वीर में वे खुद हैं और दूसरी में अपनी दोस्त के साथ। इन तस्वीरों में गीतांजलि फटी जींस पहनी हुई हैं। फोटो के साथ उन्होंने लिखा है फटी हुई मानसिकता से फटा हुआ कपड़ा ज्यादा अच्छा है। इससे पहले ही जया बच्चन व नव्या नवेली व गुल पनाक सहित कई सेलिब्रेटीज ने भी रावत के उस बयान पर अपनी प्रतिक्रिया दे चुकी हैं।

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शिवसेना सांसद प्रियंका चतुर्वेदी (Priyanka Chaturvedi) ने ट्विटर पर लिखा, ‘देश की संस्कृति और संस्कार पर उन आदमियों से फर्क पड़ता है, जो महिलाओं और उनके कपड़ों को जज करते हैं। सोच बदलो मुख्यमंत्री जी, तभी देश बदलेगा।’ वहीं, तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा (Mahua Moitra) ने लिखा है, ‘उत्तराखंड के मुख्यमंत्री कहते हैं कि जब नीचे देखा तो गम बूट थे और ऊपर देखा तो… एनजीओ चलाती हो और घुटने फटे दिखते हैं?’ सीएम साहब, जब आपको देखा तो ऊपर-नीचे-आगे-पीछे हमें सिर्फ बेशर्म-बेहूदा आदमी दिखता है।’ तीरथ रावत के बयान पर आमलोग भी अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। हर कोई फटी जींस के साथ फोटो डाल रहा है और अपनी बात मुखरता से रख रहा है।

जींस कबसे आया प्रचलन में
जींस पहनने का चलन 1870 में शुरू हो गया था। जींस को जर्मन बिजनेसमैन लोएब स्ट्रॉड्स ने डिजाइन किया था, जिसने अपना नाम बदलकर स्मअप रख लिया था और फिर वो डेनिम ब्रांड का फाउंडर बना। हालांकि रिप्ड जींस 100 साल बाद यानी 1970 में अस्तित्व में आई। इससे पहले अगर कोई कटी-फटी जींस पहननता था, तो उसका या तो मजाक उड़ाया जाता था या फिर उसे गरीब समझा जाता था। 1970 के बाद रिप्ड जींस पहनना फैशन बन गया। लोग अब खुद को फैशनेबल दिखाने के लिए अपनी जींस खुद ही घुटने के पास फाड़कर पहनने लगे थे और बाद में कंपनियों ने भी रिप्ड जींस बनाना शुरू कर दिया।

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