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Rahul Dev in Raat Baaki Hai-Filmynism

मुझे चाहने वाले लोग इतना तो जानते ही हैं कि अभी ‘रात बाकी है’: राहुल देव

कोरोना वायरस (Coronavirus) के चौतरफा कहर के कारण अभी फिल्में थियेटर के लिए रिलीज नहीं हो रही हैं और नतीजतन अच्छी-अच्छी वेबसीरीज व फिल्में ओटीटी प्लेटफाॅर्म पर आ रही हैं। इन्हीं में से एक है जी5 (Zee5) पर आ रही मिस्ट्री-थ्रिलर फिल्म ‘रात बाकी है’ (Raat Baaki Hai)। इस थ्रिलर फिल्म में राहुल देव (Rahul Dev) एक इनेवेस्टिगेटिव ऑफिसर अहलावत की भूमिका निभा रहे हैं। पत्रकार से फिल्म निर्देशक बने अविनाश दास (Avinash Das) की यह फिल्म 16 अप्रैल को स्ट्रीम की जाएगी। इसमें अनूप सोनी (Anup Soni), पाओली दाम (Paoli Dam) और दीपानीता शर्मा (Dipannita Sharma) के साथ राहुल देव ने बेहतरीन अदकारी की है, जो आपको देखने पर मजबूर कर देगी।

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डॉक्टर्स व उनके इर्द-गिर्द होने वाली रोमांचक घटनाओं पर आधारित वेबसीरीज ‘एलएसडी: लव, स्कैंडल और डाॅक्टर्स’ (LSD: Love, Scandal and Doctors) के जरिये ओटीटी दर्शकों के दिलों पर छाने वाले राहुल देव (Rahul Dev) एक बार अपनी अदाकारी का जलवा बिखेरने वाले हैं। रात बाकी है में अपने किरदार के बारे में राहुल कहते हैं कि इसमें मेरा किरदार खलनायक का नहीं है। आईपीएस ऑफिसर है। वो एक किलर की तलाश में है। एक रात की कहानी है। एक मर्डर हो जाता है और तब पता करना है कि कातिल कौन है। हू डन इट मिस्ट्री है। एक परतदार थ्रिलर है। तफ्तीश के दौरान, कई लोगों पर शक होता है।

राहुल देव (Rahul Dev) कहते हैं कि अविनाश दास (Avinash Das) बहुत अच्छे निर्देशक हैं। हर किसी का सुझाव सुनते हैं। मेरे किरदार के लिए कई जगह आप-आप जैसा संबोधन लिखा था। अविनाश जी स मैंने कहा कि अगर वो आप-आप करके बात करता है तो वो अहलावत नहीं हो सकता। अहलावत सूर्यवंशी (Sooryavanshi) जाट होते हैं। मैं दिल्ली से हूं। मेरे पिता डेकोरेटिव पुलिस अफसर थे। उन्हें गैलेंट्री अवॉर्ड मिले थे। हम कई जगहों पर रहे थे। पुलिस अफसर ऐसे नहीं होते। पुलिस का काम बेहद मुश्किल होता है। इसमें कोई कितना भी पेशेंस वाला आदमी हो, लेकिन सामने वाला अगर बदतमीजी से बात कर रहा है या सही से जवाब नहीं दे रहा है तो पुलिस वाला क्या करेगा? बता दें कि पहले यह फिल्म 20 नवम्बर को रिलीज होनी थी।

राहुल देव (Rahul Dev) कहते हैं कि अपने कॅरियर के बीस में से पांच साल तो बिल्कुल काम नहीं किया। मेरी वाइफ की डेथ हो गयी थी। 16 मई 2009 में हादसा हुआ था। अगले महीने 12 साल हो जाएंगे। उस समय 13 फिल्में थीं, जिसमें से सात-आठ बची थीं। दो साल काम करने के बाद साढ़े चार साल का ब्रेक लिया था। दिल्ली शिफ्ट हो गया था। बेटा बहुत छोटा था। मैं मीडिया के पास नहीं गया। मुझे बड़ा तमाशा लगता था। जाकर बोलूं कि मैं काम नहीं करूगां वगैरह-वगैरह। मीडिया में एलान करके छोड़ता तो बेटे को ठेस पहुंचती। वहां पैरेंट्स भी थे, उनकी फैमिली थी। यही वजह थी, जो मैं इंडस्ट्री से चला गया था। जो भी हो, मेरा तो यही मानना है कि फिल्म अच्छी बनी है, क्योंकि इसके डायरेक्टर अच्छे हैं और हमारे सभी कोस्टार अच्छे हैं। बाकी दर्शक ही हमारे काम का सही आकलन कर सकेंगे।

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