जन्मदिन मुबारक : गलियों में कलम बेचते-बेचते बॉलीवुड के कॉमेडी किंग बन गए जॉनी
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जन्मदिन मुबारक : गलियों में कलम बेचते-बेचते बॉलीवुड के कॉमेडी किंग बन गए जॉनी

ऋचा शर्मा!
बॉलीवुड में अपने हास्य अभिनय से सबको हसाने वाले कॉमेडी के बादशाह जॉनी लीवर आज साठ साल के हो गए. हिन्दी फिल्म जगत में जॉनी अपने अभिनय का लोहा मनवा चुके हैं. शुरुआती दौर में उन्होंने काफी मेहनत की है यहाँ तक कि वे मुंबई की गलियों मे कलम बेचा करते थे. अपनी मेहनत और बलबूते आज जॉनी के सिर पर कॉमेडी किंग का ताज है. हिन्दी फिल्म जगत में उन्होंने तकरीबन साढे तीन सौ से भी अधिक फिल्मों मे काम किया है. अवार्ड की बात करें तो जॉनी भाई की झोली अवॉर्डो से गुलजार है. उन्हें 13 बार फिल्मफेयर अवार्ड से सम्मानित किया गया है. उन्होंने बॉलीवुड मे अपने कैरियर की शुरुआत 1984 से की थी. हिन्दी फिल्मों के अलावा उन्होंने महेश भट्ट की तेलुगु फिल्म “क्रिमिनल” मे भी अभिनय किया है. हिन्दी फिल्मों मे उनकी शुरुआत सुनिल दत्त की फिल्म “दर्द का रिश्ता” से हुई. बडे पर्दो के अलावा जॉनी ने छोटे पर्दो पर भी अपने अभिनय का अमिट छाप छोड़ा है. उन्होंने सीरियल “जॉनी आला रे” में भी काम किया है. 2007 मे बतौर जज कॉमेडी सर्कस में दिखाई दिए. फिल्मी सितारों की मिमिक्री करने मे उन्हे महारथ हासिल है.
दमदार अभिनय के लिए उन्हें 1997 में सर्वश्रेष्ठ हास्य अभिनेता के लिए स्टार सीन अवॉर्ड ( राजा हिन्दुस्तानी), 1998 मे सर्वश्रेष्ठ हास्य अभिनेता अवॉर्ड (दीवाना मस्ताना) , 1999 मे फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ हास्य अभिनेता अवॉर्ड (दूल्हे राजा), 2002 मेंसर्वश्रेष्ठ जी सिने अवॉर्ड ( लव के लिए कुछ भी करेगा) से सम्मानित किया गया.
हालांकि जॉनी के जीवन में एक दौर ऐसा आया, जब उन्‍होंने फिल्‍में पूरी तरह छोड़ दी थीं. अपना झुकाव धर्म और अध्‍यात्‍म की तरफ कर लिया था. धर्म उपदेशक बन गए थे. मुंबई, चेन्‍नई और यहां तक की अमेरिका में हर संडे होने वाली उनकी प्रार्थना सभाओं में सैकड़ों लोग जुटने लगे थे. अपने अंदर आए इस बदलाव की वजह बताते हुए उन्होने कहा था, ये ईश्‍वर की इच्‍छा थी. मैं हमेशा से एक धार्मिक इंसान रहा हूं. लेकिन इस वाकये ने मेरा जीवन बदल दिया. मेरा बेटा कैं‍सर से पीडि़त था. मैं बहुत परेशान और लाचार हो गया था. मैंने फिल्‍में करना छोड़ दी थीं. 14 अगस्त, 1957 को आंध्र प्रदेश के कनिगिरी में तेलुगु क्रिश्चियन फैमिली में जन्मे जॉनी लीवर खराब फाइनेंशियल कंडीशन ठीक नहीं थी, जिस कारण उन्होने आंध्र प्रदेश के एक तेलुगु स्कूल से महज सातवीं तक पढ़ाई ही की. इसके बाद कम उम्र में ही वे मुंबई आ गए और पेट भरने के लिए उन्होंने मुंबई की सड़कों पर पेन बेचना शुरू कर दिया था. वो बॉलीवुड गानों पर डांस करते हुए और एक्टर्स की नकल करते हुए पेन बेचते थे और फिर एक दिन बॉलीवुड के हास्य अभिनय के बादशाह बन गए.

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