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Movie Review : ‘दुर्गामती’ में हॉरर, रहस्य, रोमांच, कॉमेडी, फिर भी दर्शकों ने दिया लड्डू

नई फिल्म ‘दुर्गामती’ अक्षय ने पूरी तरह मध्यप्रदेश में बनाई है। फिल्म कितनी असली लोकेशन्स पर शूट हुई है और कितनी स्टूडियो की नकली हवेली में। हालांकि फिल्म रिलीज होने के बाद दर्शकों का अच्छा रिस्पॉन्स नहीं मिला है।

फिल्म की कहानी की बात करें तो कहानी है चंचल चौहान (भूमि पेडणेकर) की, जो एक आईएएस ऑफिसर थी और अपने प्रेमी शक्ति (करण कपाड़िया) की हत्या के जुर्म में जेल में बंद है। वह ईश्वर प्रसाद (अरशद वारसी) नामक मंत्री की सेक्रेटरी थी। ईश्वर प्रसाद बेहद ईमानदार मंत्री है। ईश्वर के विरोधी उसकी छवि बिगाड़ने की जवाबदारी सीबीआई ऑफिसर सत्कशी गांगुली (माही गिल) को सौंपते हैं। सत्कशी को लगता है कि यदि चंचल, ईश्वर प्रसाद की कुछ कमजोरी बता दे तो उसका काम आसान हो सकता है। वह चंचल को रानी दुर्गामती की भूतहा हवेली में पूछताछ के लिए बुलाती है, लेकिन वहां पर चंचल पर दुर्गामती के भूत का साया पड़ जाता है।

कहानी में हॉरर, रहस्य, रोमांच, कॉमेडी जैसे कई तत्व डाले गए हैं और यह तमिल-तेलुगु फिल्म ‘भागमती’ का हिंदी रीमेक है। दक्षिण भारतीय फिल्मकारों के साथ दिक्कत यह होती है कि वह हिंदी भाषी दर्शकों के लिए भी लाउड फिल्में बना देते हैं, जो यहां के दर्शकों को पसंद नहीं आती। वही भूमि पेडणेकर का अभिनय बढ़िया है। वे जितना फिल्म की बेहतरी के लिए कर सकती थीं उन्होंने किया। अरशद वारसी का अभिनय औसत के आसपास रहा।

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