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Movie Review: सिर्फ एक ‘थप्‍पड़’…

बॉलीवुड फिल्‍म ‘थप्‍पड़’ (Thappad)’ निर्देशक अनुभव सिन्‍हा (Anubhav Sinha) ने तापसी पन्‍नू (Taapsee Pannu) और कुछ बेहद जबरदस्‍त किरदारों की एक ऐसी कहानी पर्दे पर गढ़ी है, जो सिर्फ एक थप्‍पड़ पर नहीं बल्कि उसके इर्द-गिर्द तैयार हुए पूरे ताने-बाने और हर उस सवाल को कुरेद के निकालने की कोशिश है. जिसने इस ‘सिर्फ एक थप्‍पड़’ को हक का दर्जा दे दिया.

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ये कहानी है अमृता (तापसी पन्नू) और विक्रम ( पवैल गुलाटी) की, जिनकी शादीशुदा जिंदगी परफेक्ट है. अमृता सुबह उठने से लेकर रात को सोने त‍क, बस अपने पति और परिवार के इर्द-गिर्द घिरी जिंदगी में बिजी है और इस ‘परफेक्‍ट’ सी जिंदगी में बहुत खुश है. लेकिन इसी बीच एक दिन उनके घर हुई पार्टी में विक्रम, अमृता को एक जोरदार थप्‍पड़ मार देता है और सबकुछ बदल जाता है.

अमृता ‘सिर्फ एक थप्‍पड़’ के लिए तैयार नहीं थीं, लेकिन उसके आसपास के लोगों के लिए ये बात पचा पाना बहुत मुश्किल है कि आखिर सिर्फ एक थप्‍पड़ की वजह से कोई अपने ‘सुखी संसार’ को छोड़ने का फैसला कैसे ले सकता है. ये कहानी इसी सवाल के चारों तरफ है, ‘एक थप्‍पड़ ही तो है, इतनी सी बात के लिए कोई घर थोड़े ही छोड़ता है.’

दरअसल इस फिल्‍म के ट्रेलर के बाद आपके दिमाग में भी यही सवाल उठते हैं, कि आखिर एक थप्‍पड़ और उससे किसी औरत का तलाक जैसे बड़े फैसले पर पहुंचना कहानी में बिल्‍डअप कैसे हो पाएगा. क्‍योंकि सुनने में ये प्रैक्टिकल नहीं लगता… लेकिन ये फिल्‍म आपके इन सारे सवालों के जवाब देती है.

इस कहानी को भले ही अमृता के साथ हुई घटना के आसपास बुना गया है, लेकिन इस फिल्‍म में हर उम्र और सामाजिक स्‍तर की महिलाओं को दिखाया गया है. इस‍ फिल्‍म में कई स्‍तर पर बताया गया है कि महिलाओं के प्रति आपकी सोच कैसी है. जैसे एक सीन में पड़ोस की महिला (द‍िया मिर्जा) जब आपसे बड़ी गाड़ी में निकलती है तो विक्रम कहता है, ‘ये करती क्‍या है..’ और महिला ड्राइवर को देखकर उसके मुंह से निकलता है ‘ये सड़कों पर निकलती क्यों हैं.’

ये फिल्‍म कुछ जगह पर आपको थोड़ी स्‍लो लग सकती है क्‍योंकि कई सीन ऐसे हैं, जिनमें कोई डायलॉग ही नहीं है. लेकिन अगर आप इस फिल्‍म के शुरुआती सीन से ही इसके साथ जुड़ जाते हैं तो आप समझ पाएंगे कि ये साइलेंस ही इस फिल्‍म का सबसे दमदार है.

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